रमज़ान अनगिनत बरकतों का महीना है, और इस्लाम का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह वह महीना है जो हमें अल्लाह के क़रीब आने के कई अवसर प्रदान करता है। साथ ही, रमज़ान वह महीना भी है जिसमें अल्लाह ने अपने अंतिम दूत, पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) को क़ुरान का अवतरण किया था।
इस लेख में, मैंने रमज़ान और उपवास के बारे में क़ुरान की कुछ सरल आयतें संकलित की हैं।
रमज़ान और उपवास के बारे में क़ुरान की आयतें
1. क़ुरान 02:183 (सूरह अल-बक़राह)
हे ईमान वालो! तुमपर रोज़े उसी प्रकार अनिवार्य कर दिये गये हैं, जैसे तुमसे पूर्व के लोगों पर अनिवार्य किये गये, ताकि तुम अल्लाह से डरो।
2. क़ुरान 02:184 (सूरह अल-बक़राह)
वह गिनती के कुछ दिन हैं। फिर यदि तुममें से कोई रोगी अथवा यात्रा पर हो, तो ये गिनती, दूसरे दिनों से पूरी करे और जो उस रोज़े को सहन न कर सके, वह फ़िद्या (प्रायश्चित्त) दे, जो एक निर्धन को खाना खिलाना है और जो स्वेच्छा भलाई करे, वह उसके लिए अच्छी बात है। यदी तुम समझो, तो तुम्हारे लिए रोज़ा रखना ही अच्छा है।
3. क़ुरान 02:185 (सूरह अल-बक़राह)
रमज़ान का महीना वह है, जिसमें क़ुरान उतारा गया, जो सब मानव के लिए मार्गदर्शन है तथा मार्गदर्शन और सत्योसत्य के बीच अन्तर करने के खुले प्रमाण रखता है। अतः जो व्यक्ति इस महीने में उपस्थित हो, वह उसका रोज़ा रखे, फिर यदि तुममें से कोई रोगी अथवा यात्रा पर हो, तो उसे दूसरे दिनों में गिनती पुरी करनी चाहिए। अल्लाह तुम्हारे लिए सुविधा चाहता है, तंगी (असुविधा) नहीं चाहता और चाहता है कि तुम गिनती पूरी करो तथा इस बातपर अल्लाह की महिमा का वर्णन करो कि उसने तुम्हें मार्गदर्शन दिया और (इस प्रकार) तुम उसके कृतज्ञ बन सको।
4. क़ुरान 02:187 (सूरह अल-बक़राह)
तुम्हारे लिए रोज़े की रात में अपनी स्त्रियों से सहवास ह़लाल (उचित) कर दिया गया है। वे तुम्हारा वस्त्र हैं तथा तुम उनका वस्त्र हो, अल्लाह को ज्ञान हो गया है कि तुम अपना उपभोग कर रहे थे। उसने तुम्हारी तौबा (क्षमा याचना) स्वीकार कर ली तथा तुम्हें क्षमा कर दिया। अब उनसे (रात्रि में) सहवास करो और अल्लाह के (अपने भाग्य में) लिखे की खोज करो और रात्रि में खाओ तथा पिओ, यहाँ तक की भोर की सफेद धारी रात की काली धारी से उजागर हो जाये, फिर रोज़े को रात्रि (सूर्यास्त) तक पूरा करो और उनसे सहवास न करो, जब मस्जिदों में ऐतिकाफ़ (एकान्तवास) में रहो। ये अल्लाह की सीमायें हैं, इनके समीप भी न जाओ। इसी प्रकार अल्लाह लोगों के लिए अपनी आयतों को उजागर करता है, ताकि वे (उनके उल्लंघन से) बचें।